कब आम आदमी का उत्पीड़न बंद होगा। क्या ट्रांसपोर्ट व्यवसाई इतना बड़ा अपराधी है। पूरी जनता से लेके पूरा प्रशाशन तक उसके पीछे पड़ा रहता है। क्यों1 इस पर विचार नहीं होता। क्यों एक ट्रांसपोर्ट व्यवसाई अपने ही देश में गुलामों की जिन्दगी जी रहा है। हमको इस उत्पीड़न से कब आजादी मिलेगी।है कोई ऐसी सरकार। है कोई इन मुद्दों पर संसद में चर्चा करने वाला।
एक शहर में माना दस सी चौकियां हैं तो दस आदमी चालान करने वाले बन जा रहे हैं। अगर उनसे कुछ पूछो तो सीधे गाड़ी बंद करने की धमकी देते हैं। आखिर एक विवश लाचार आदमी क्या करे। है किसी के पास इस सवाल का जवाब। मेरी सरकार से अपील है कृपया इस बीमारी की वजह से आम जन मानस परेशान है। उसके ऊपर पुलिस वालों द्वारा भारी भरकम चालान हाथ पांव बांध कर गला दबा देने जैसा प्रतीत हो रहा है। अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कृपया कोई ऐसा तरीका निकाला जाय जिससे आम आदमी का उत्पीड़न बंद हो। और कोई भी व्यवसाई आत्महत्या करने पर मजबूर ना हो। एक दिन के दस दस चालान कर रहे हैं पुलिस वाले। इनका क्या ओचित्य है समझाए सरकार। भार वाहन चलाना तो बहुत ही टेढ़ी खीर हो गया है। अतः भार वाहन व्यवसाई आत्म हत्या करने पर विवश ना हो इस विषय पर सरकार को उचित निर्णय लेने की अति आवश्यकता है। कोई ठोस नीति बनाकर जगह जगह पुलिस उत्पीड़न को बन्द करवाया जाय। अगर सरकार में कुछ मानवता बची है। या सबका साथ सबका विकास वाली कोई नीति है तो ट्रांसपोर्टरों की समस्यों का समाधान किया जाए।
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03/19/2025 358 -
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